Marco Rubio भारत और अमेरिका के बीच संबंध हमेशा से रणनीतिक साझेदारी माने जाते रहे हैं। लेकिन हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ (Tariff on Indian exports) ने दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बना दी है। इसी बीच अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio का बयान आया है, जिसमें उन्होंने भारत को “मित्र और सहयोगी” बताया, लेकिन रूस से तेल खरीदने को लेकर चिंता भी जताई।
Marco Rubio का बयान: “भारत सहयोगी है, लेकिन 100% सहमति हमेशा संभव नहीं”
अमेरिकी मंत्री Marco Rubio ने साफ कहा:
- “भारत हमारा मित्र और रणनीतिक साझेदार है। लेकिन हर मुद्दे पर 100% सहमति संभव नहीं है।”
- उन्होंने स्वीकार किया कि भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना अमेरिका और भारत के रिश्तों में एक “point of irritation” यानी चिंता का कारण है।
यह बयान साफ दर्शाता है कि अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, खासकर यूक्रेन युद्ध के समय।
स्वतंत्रता दिवस पर विशेष संदेश: ऐतिहासिक साझेदारी
भारत के 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर Marco Rubio ने एक भावनात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा:
- “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र (भारत) और सबसे पुराने लोकतंत्र (अमेरिका) के बीच का रिश्ता ऐतिहासिक और दूरगामी है।”
- Rubio ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका टेक्नोलॉजी, स्पेस, नवाचार और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
- उनका कहना था कि दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान करेंगे और एक सुरक्षित भविष्य बनाएँगे।

टैरिफ विवाद के बीच भी रिश्ते मजबूत
हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है — जिसमें 25% “reciprocal duty” और 25% अतिरिक्त penalty शामिल है। इसका सीधा असर भारत के $50 बिलियन एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है।
फिर भी Marco Rubio ने साफ कहा:
“India-US ties remain strong. हम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा विज़न के साथ काम करते रहेंगे।
विश्लेषण: India–US रिश्तों का भविष्य
- सकारात्मक पक्ष: दोनों देश रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा में गहरे साझेदार हैं।
- चुनौतियाँ: रूस से भारत की तेल खरीद और अमेरिका का टैरिफ विवाद आगे भी रिश्तों में तनाव ला सकता है।
- संभावनाएँ: अगर Bilateral Trade Agreement (BTA) सफल रहा तो आने वाले समय में दोनों देशों का व्यापार $500 बिलियन तक पहुँच सकता है।
Marco Rubio के बयान से यह साफ है कि भले ही टैरिफ विवाद और रूस से तेल आयात जैसे मुद्दों पर असहमति हो, लेकिन भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत बने रहेंगे। दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देंगे और आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और व्यापार में एक बड़ी भूमिका निभाएँगे।
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