बिहार का हर जिला अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। सिवान जिले के महाराजगंज में लगने वाला मौनिया बाबा महावीरी झंडा मेला न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वांचल का एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मेला है। यह मेला पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय से श्रद्धा और भक्ति का केंद्र रहा है। इस वर्ष (2025) इस मेले को पहली बार राजकीय मेला का दर्जा प्राप्त हुआ है।
मौनिया बाबा कौन थे?
मौनिया बाबा एक सिद्ध संत थे जिन्हें गौ-रक्षक और लोक कल्याणकारी संत के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि वे हमेशा “मौन” रहते थे, इसलिए लोगों ने उन्हें “मौनिया बाबा” कहा। भक्तजन मानते हैं कि उनकी समाधि पर मनोकामना मांगने से इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। यहाँ दूध, दही, फूल और भभूत चढ़ाने की परंपरा है।
मौनिया बाबा मेला का इतिहास
- इस मेले की शुरुआत सन 1923 में हुई थी।
- इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ गुलामी के विरुद्ध आवाज उठाना और सामाजिक एकता को मजबूत करना था।
- नागा संप्रदाय के महंतों के नेतृत्व में यह परंपरा शुरू हुई और धीरे-धीरे यह पूरे बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में लोकप्रिय हो गया।
- पिछले 102 वर्षों से यह मेला लगातार लग रहा है और हर साल लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
2025 का मौनिया बाबा मेला – ताज़ा अपडेट
इस साल का मौनिया बाबा महावीरी झंडा मेला खास है क्योंकि इसे पहली बार बिहार सरकार द्वारा राजकीय मेला का दर्जा दिया गया है।
- शुभारंभ : 22 अगस्त 2025 की शाम पूजा-अर्चना और झंडा रोहण के साथ हुआ।
- अवधि : यह मेला लगभग एक महीने तक चलेगा।
- सुरक्षा व्यवस्था : प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, कंट्रोल रूम, पुलिस बल और मेडिकल टीम की विशेष व्यवस्था की है।
- प्रतिबंध : मेले में डीजे, अश्लील गाने, शराब, हथियार और राजनीतिक झांकियों पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
सांस्कृतिक और धार्मिक आकर्षण
अखाड़ा प्रदर्शन और झांकियाँ
- मेले में इस बार 22 महावीरी अखाड़ों ने हिस्सा लिया।
- अखाड़ों के जुलूस, लाठी-डंडा और पारंपरिक युद्धकला का प्रदर्शन सबसे बड़ा आकर्षण रहता है।
- शाम को सजाई जाने वाली झांकियाँ और शोभायात्राएँ भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

लोकगीत और भोजपुरी संस्कृति
- मेले में भोजपुरी लोकगीतों और भक्ति गीतों की गूंज माहौल को और भी पवित्र बना देती है।
- यहां स्थानीय कलाकारों द्वारा नाटक, गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
व्यापार और मनोरंजन
मेला सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी सहारा है।
- यहाँ लकड़ी और लोहे के बने सामान (आलमारी, संदूक, ओखल-मूसल आदि) खूब बिकते हैं।
- मीना बाजार में कपड़े, खिलौने, गहने और घरेलू उपयोग की वस्तुएँ मिलती हैं।
- बच्चों और युवाओं के लिए झूले, ड्रैगन ट्रेन, मौत का कुआँ, सर्कस और ब्रेक डांस जैसे मनोरंजन के साधन उपलब्ध हैं।
- पौधों की नर्सरी और कृषि उपकरणों की भी बिक्री होती है।
प्रशासनिक तैयारियाँ और महत्व
इस साल मेला राजकीय दर्जा मिलने के बाद प्रशासन ने इसे और भव्य बनाने की योजना बनाई।
- 17 अगस्त 2025 से ही मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रंग-रोगन और साज-सज्जा शुरू कर दी गई थी।
- डीएम, एसपी, एसडीओ और नगर पंचायत की संयुक्त टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।
- मेले में मेडिकल कैंप और हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं।
धार्मिक महत्व और आस्था
- भक्त मानते हैं कि मौनिया बाबा की समाधि पर दूध-दही चढ़ाने और भभूत लगाने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
- सावन और भादो महीने में यह मेला आयोजित होता है, जो विशेष रूप से शिवभक्तों और नागा संप्रदाय से जुड़ा हुआ है।
- यहाँ हर वर्ग और हर धर्म के लोग शामिल होकर साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हैं।
मौनिया बाबा मेला और पर्यटन
अब जब इसे राजकीय मेला का दर्जा मिल गया है तो पर्यटन की दृष्टि से भी इसका महत्व बढ़ गया । मौनिया बाबा महावीरी झंडा मेला
- बिहार सरकार अब इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
- आसपास के जिलों से ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल से भी लोग यहाँ आते हैं।
मौनिया बाबा महावीरी झंडा मेला महाराजगंज (सिवान, बिहार) सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर है।
यह मेला सामाजिक एकता, लोक परंपरा और आस्था का प्रतीक है।
2025 में राजकीय दर्जा मिलने के बाद इस मेले का महत्व और भी बढ़ गया है।
आने वाले वर्षों में यह मेला न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आकर्षण बनने वाला है।
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